कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब में सीएम पद की शपथ ली, कैप्टन अमरिंदर के साथ 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली.
अमरिंदर ने दूसरी बार पंजाब के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. पंजाब में कैप्टन का रुतबा क्या है और वो कांग्रेस पार्टी के लिए इतने अहम क्यों हैं, इसका जवाब यहां है, सभी तरफ से हावी होती मायूसी के बीच पंजाब की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हुई है. एक बार फिर जब वो सत्ता पर काबिज हुई है तो इसके पीछे कैप्टन अमरिंदर सिंह का अहम योगदान है. इस जीत के नायक सिर्फ और सिर्फ अमरिंदर सिंह हैं तो शायद गलत नहीं होगा.
पटियाला राजघराने के अमरिंदर सिंह ने अपने करियर की शुरुआत सेना से की थी। बतौर कैप्टन 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ने के बाद उन्होंने सेना छोड़ दी. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सियासत में एंट्री कराई.
1980 में पहली बार कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में इन्होंने लोकसभा के साथ-साथ कांग्रेस की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. 1985 में कैप्टन शिरोमणि अकाली दल में शामिल हो गए. 1992 में मोहभंग होने पर इन्होंने शिरोमणि अकाली दल पी यानि पंथिक के नाम से नई पार्टी बनाई. 1998 में एसएडी पी का कांग्रेस में विलय हो गया. इसके बाद से कैप्टन अमरिंदर सिंह लगातार कांग्रेस को मजबूत करने में जुटे रहे.
1999 से 2002 तक पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. 2002 से 2007 तक वो प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. 2008 में उन्हें पंजाब में चुनाव प्रचार कमेटी का चेयरमैन बनाया गया. 2010 में वो एक बार फिर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने और 2013 तक इस पद पर रहे. 2013 से वो अब तक कांग्रेस की वर्किंग कमेटी में शामिल हैं.
2014 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर लोकसभा सीट से बीजेपी के दिग्गज अरुण जेटली को हराकर वो संसद पहुंचे. 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 2015 में उन्हें एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई. एसवाईएल के मुद्दे पर 2016 में उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा देकर अपना ध्यान 2017 के चुनाव पर कर दिया. खुद पटियाला के साथ-साथ सीएम को चुनौती देने के इरादे से लंबी सीट से भी कैप्टन मैदान में कूदे. हालांकि लंबी में वो प्रकाश सिंह बादल से चुनाव हार गए. लेकिन कांग्रेस को जबरदस्त जीत दिलाने में कामयाब रहे.
कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने सियासी सफर में कई जीत दर्ज कर चुके हैं. कैप्टन 5 बार पंजाब विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं. तीन बार पटियाला शहरी सीट से जबकि समाना और तलवंडी साबो से एक-एक बार जीत दर्ज कर चुके हैं. पंजाब में कांग्रेस को शिखर तक पहुंचाकर अब कैप्टन दोबारा बतौर मुख्यमंत्री राज्य की सेवा करेंगे।



















































